टिप्पणी

क्यों कि मैं उन्हें देवता नहीं बना सकता !

हां, मैं यह बात पूरे मन से स्वीकार करता हूं और कि पूरी विनम्रता से स्वीकार करता हूं कि मुझे एक बहुत बड़ी बीमारी है । लाइलाज बीमारी ।...
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संस्मरण

एक दीवाना आदमी यानी बेचैन बिहारी, कृष्ण बिहारी

दीवानों की तो बातें दीवाने जानते हैं, जलने में क्या मज़ा है, परवाने जानते हैं ! मेरे कुछ बहुत थोड़े से मित्रों में एक ऐसा ही दीवाना आदमी  है...
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लेख

नवीन जोशी, दावानल और उन का संपादक

नवीन जोशी के रिटायरमेंट के बहाने कुछ सवाल , कुछ बतकही हिंदुस्तान के लखनऊ में कभी कार्यकारी संपादक रहे नवीन जोशी ने आज अपने रिटायर हो जाने की सूचना...
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टिप्पणी

अपनी तारीफ़ सुन कर लजा जाने वाले हिमांशु जोशी

हिमांशु जोशी से मैं पहली बार मई,१९७९ में साप्ताहिक हिंदुस्तान, नई दिल्ली के दफ़्तर में मिला था।  प्रेमचंद पर एक परिचर्चा ले कर। उन्हों ने उसे खूब फैला कर...
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समीक्षा

विषय के अंतिम तह तक धंस कर लिखने की जिद और नकलीपन से मुक्त कहानियों का स्पेस

प्रदीप श्रीवास्तव   अद्भुत पठनीयता दयानंद पांडेय की कहानियों की विशेषता है। उन के पांचवें कहानी संग्रह ‘सुमि का स्पेस’ की कहानियां जीवन के यथार्थ को तो दर्शाती हैं...
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संस्मरण

हम पत्ता, तुम ओस

 वो हैं पास और याद आने लगे हैं  मुहब्बत के होश अब ठिकाने लगे हैं । अपने विवाह की बत्तीसवीं सालगिरह पर आज 28 जून, 2014 को खुमार बाराबंकवी...
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टिप्पणी

अगर फेसबुक न होता तो जाने कितने पागलखाने खोलने पड़ गए होते

  फेसबुक अब भले ही हमारे जैसे लोगों के लिए असाध्य बीमारी बन गई हो पर यह भी तय है कि अगर फेसबुक  न होता तो जाने कितने पागलखाने...
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राजनीति

अखिलेश सरकार हाराकिरी की राह पर अग्रसर

अखिलेश सरकार की जैसे मति मारी गई है। पहले अखिलेश यादव ने ऐन चुनाव के पहले दैनिक जागरण के मालिकानों से मोर्चा खोल लिया। और अब अमर उजाला के...
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अखिलेश यादव एक असफल ही नहीं निकम्मे प्रशासक बन कर उपस्थित हुए हैं

 फेसबुकिया नोट्स की एक और लड़ी  अखिलेश यादव को मुलायम सिंह यादव अगर परिवारवाद की जकड़न और प्रशासन में यादव वर्चस्व से मुक्ति दे दें, थाना प्रभारियों में यादवों...
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टिप्पणी

नारायण दत्त जी के निधन की खबर मिली तो मन बहुत उदास हो गया

नारायण दत्त जी सचमुच बहुत ही विनम्र व्यक्ति थे। विनम्र और सहृदय ! मेरे लिए उन के लिखे पोस्ट कार्ड मन में जैसे अभी भी टटका हैं। जब वह...
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