तो दलित हितों के लिए वह राष्ट्र के खिलाफ़ भी जाएंगे

लखनऊ विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के एक आचार्य हैं कालीचरण स्नेही। जब भी कहीं कुछ बोलते हैं विष-बुझा ही बोलते हैं। राम जाने वह विश्वविद्यालय में छात्रों को पढ़ाते...
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चुनावी बयार में बहते कुछ फ़ेसबुकिया नोट्स

तो क्या सामाजिक न्याय और धर्मनिर्पेक्षता की दुहाई सिर्फ़ और सिर्फ़ लफ़्फ़ाज़ी नहीं है? अगर नहीं है तो यह तमाम-तमाम राजनीतिक दल भाजपा और मोदी से लड़ने के लिए...
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फिल्म

एक औरत का अकेले हनीमून पर जाना !

पुरुष सत्ता को चुनौती देती और हिंदी सिनेमा में बदलती घर की औरत की दास्तान  ! क्या कोई औरत अकेले हनीमून पर जा सकती है? बिना पुरुष साथी के?...
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टिप्पणी

कथा सेबी के काले दूध और सोनिया-मन मोहन-चिदंबरम के रचे लाक्षागृह की !

सोनिया-मन मोहन के लाक्षागृह से रिहा हो जाएंगे सहाराश्री   स्कूल के दिनों में कहीं पढ़ा था कि किसी देश के लिए सेना से भी ज़्यादा ज़रुरी होती है...
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टिप्पणी

सपने में सिनेमा का पाठ साहित्योत्सव, 2014 में

 साहित्य अकादमी के साठ साल साहित्य अकादमी ने अपने साठ साल का होने पर दिल्ली में बीते 10 मार्च से 15 मार्च तक साहित्योत्सव, 2014 का आयोजन किया। देश...
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राजनीति

मोदी अब एक नई दहशत हैं हिंदुस्तान ही नहीं, पाकिस्तान के लिए भी

लेकिन यह देश तो किसी एक मोदी की जागीर नहीं है और अब लीजिए देश के तमाम-तमाम सेक्यूलर और मुसलमान समेत मीडिया ने जैसे मान लिया हैं कि नरेंद्र...
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समीक्षा

मीडिया के दिल भी हारमोनियम जैसे हैं जो बजते-बजते किसी पत्थर की चोट से टूट जाते हैं

शन्नो अग्रवाल समय के साथ हर चीज़ में परिवर्तन होता रहा है l चाहें वो प्रकृति हो या इंसान, सामाजिक रीति-रिवाज या किसी व्यावसायिक संस्था से जुड़ी धारणाएं l...
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टिप्पणी

सहाराश्री की गिरफ़्तारी के बहाने कुछ सवाल

तो क्या सहाराश्री भाग जाते? कि वह भगोड़े हैं। अगर वह श्रवण कुमार की तरह अपनी मां की सेवा सारा रिस्क ले कर कर रहे थे तो क्या उन...
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उपन्यास

लोक कवि अब गाते नहीं का भोजपुरी अनुवाद

अनुवाद : डा. ओमप्रकाश सिंह  आज मातृभाषा दिवस है। तो मैं ने सोचा कि क्यों न अपनी मातृभाषा भोजपुरी में ही  अपने एक उपन्यास को  मित्रों से शेयर करुं।...
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